पापा मैं नन्ही बिटिया तुम्हारी,
नींद से बोझिल आंखों से इंतजार करती हूँ।
शिकवा है मन में देर की तुमने,
फ़िर भी उम्मीद दिल को तुम्हारे आने की ।
उदास कदम जब घर लौटेंगे,
मेरी कोमल बाहें जकड लेगी कदम तुम्हारे,
और थके होंठ मुस्कुरा उठेंगे,
मेरी पनीली आंखों को पौंछना।
बलीस्थ बाँहों से पकड़ बिठा लेना काँधे पे मुझे ,
मेरी किलकारी से भर उठेगा आँगन,
मेरी-तुम्हारी आंखों से बरसेगा सावन ।
दो लम्हें शान्ति से बैठना,
मैं रख दूंगी गोदी में तुम्हारी सर अपना,
मेरे होंठ शायद कुछ बोल ना पाये,
मेरे हथेली अपने माथे पे रखना ,
मेरी उँगलियों की थिरकन सुनना,
हौले से मेरा माथा थपथपाना ।
फ़िर मैं-तुम शान्ति से सो जायेंगे।
पापा मैं आस्था तुम्हारी,
तुम्हारा इंतजार करती हूँ।


